जय माँ शारदे …….. ————————- कलम तू ऐसे चल कि शब्दों की मर्यादा बनी रहे।

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- मुक्तक

जय माँ शारदे ……..
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कलम तू ऐसे चल कि शब्दों की मर्यादा बनी रहे।
रचे जब कोई रचना तो रचनाओं की मर्यादा बनी रहे।
ओ सरस्वती के शिष्य,रची तेरी रचना पढ़े जब कोई
माता के भक्त,तो माँ शारदे की मर्यादा बनी रहे।
@पूनम झा।कोटा,राजस्थान।

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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

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