जय माँ शारदे …….. ————————- कलम तू ऐसे चल कि शब्दों की मर्यादा बनी रहे।

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- मुक्तक

जय माँ शारदे ……..
————————-
कलम तू ऐसे चल कि शब्दों की मर्यादा बनी रहे।
रचे जब कोई रचना तो रचनाओं की मर्यादा बनी रहे।
ओ सरस्वती के शिष्य,रची तेरी रचना पढ़े जब कोई
माता के भक्त,तो माँ शारदे की मर्यादा बनी रहे।
@पूनम झा।कोटा,राजस्थान।

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 53
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
पूनम झा
Posts 58
Total Views 1.1k
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia