जय-जयकार हिंदी की

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- कविता

क्या बात है जग में,अरे!भाषा हिंदी की।
नीलगगन में चंदा-सी,है आभा हिंदी की।।

देवनागरी लिपि इसकी,है बनावट में सुंदर।
देती हो शोभा जैसे,ये माथे पर बिंदी की।।

बोलने और लिखने में,सरल बहुत है हिंदी।
है वैज्ञानिक ये तो,एक मिसाल जिंदी की।।

संविधान की धारा 343 में,है राजभाषा ये।
बोलते करोड़ों जन,कितनी चाहत हिंदी की।।

टी ओ टू एस ओ सो,बडी उलझन अंग्रेजी।
जैसा बोलो वैसा लिखो,ये करामात हिंदी की।।

किस्से कहानी कविताएँ,हर विधा का सागर।
झरता ज्ञान का झरना,ज्यों जज्बात हिंदी की।।

सेवक बन हिंदी का रे,प्रचार बढा तू प्रीतम।
हर जुबां हो एकदिन,जय जयकार हिंदी की।।

…..राधेयश्याम बंगालिया प्रीतम कृत
…..सर्वाधिकार सुरक्षित……..

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