जमाना हुआ खुद से मिले

Dr ShivAditya Sharma

रचनाकार- Dr ShivAditya Sharma

विधा- कविता

वक्त मिले तो बैठूं अपने साथ
की जमाना हुआ खुद से मिले।
करूँ कुछ शिकवे करुँ कुछ गिले
की जमाना हुआ खुद से मिले।
थे जगे ऊपर से अंदर से पर सोए
बेवजह की दुनियादारी में बिना वजह ही खोए।
दुनियादारी में खोए तो लगा पता
दुनिया है बस मतलब कि हमसे ना किसी को वास्ता।
हमसे ना किसी को वास्ता तो कैसे ये दिखावटी सिलसिले
क्यूँ ना बैठूं साथ अपने की जमाना हुआ खुद से मिले।

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 133
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Dr ShivAditya Sharma
Posts 16
Total Views 1.8k
Consultant Endodontist. Doctor by profession, Writer by choice. बाकी तो खुद भी अपने बारे में ज्यादा नहीं जानता, रोज़ जिन्दगी जैसी चोट करती है वैसा ही ढल जाता हूँ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia