जब हम मुस्कुराने लगे

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- गज़ल/गीतिका

आज जब हम यूं ही गुनगुनाने लगे ।
बहारें भी साथ साथ मुस्कुराने लगे ।
*
विहंग का कलरव मन मोहित करता
उसके स्वर मधुर संगीत बनाने लगे।
*
गुल खिल रहे देखो गुलशन गुलशन
गुंजन कर रहे भ्रमर,गीत सुनाने लगे।
*
पंख फैलाये ये रंग बिरंगी तितलियाँ
मिलकर फूल से, खिलखिलाने लगे।
*
रश्मियां बिखेर रहे धरा पर भास्कर
प्रकाश से तम को देखो भगाने लगे।
*
खिलखिलाती नजर आती है दुनियां
हँसते रहो तो वो साथ निभाने लगे।
*
खुद से हंसते रहो "पूनम" दुखी मन
से तो हंसता हुआ जग भी रुलाने लगे।
@पूनम झा। कोटा, राजस्थान
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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

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