*जब बेटी बड़ी हो जाती है …*

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

उछल कूद बंद हो जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

चंचलता पीछे छूट जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

हँसी भी नियमित हो जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

बोलने से पहले सोचने लग जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

हया गहना बन जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

गैर नजरों से डरने लग जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

भला बुरा सोचने लग जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

गति ठहराव बन जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

कोमल कली फूल बन जाती है ।
जब बेटी बड़ी हो जाती है ।।

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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