जब दिल लगाना ही नहीं था तुमको बाते ही ना करते

Awneesh kumar

रचनाकार- Awneesh kumar

विधा- कविता

जब दिल लगाना ही नहीं था तुमको,
बाते ही ना करते।
बातो से रिझाना ही नहीं था तुमको,
तुम सन्देश ही ना करते।
यादे समेट निकलते तुम्हारी यादो के,
इउ स्मृतियो पर तो पहरा ही ना करते।
अगर दिल ना तोडा होता आज,
ये दर्द सायरी का हम शौख ही ना करते।
(अवनीश कुमार)

Sponsored
Views 8
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Awneesh kumar
Posts 63
Total Views 564
नमस्कार अवनीश कुमार www.awneeshkumar.ga www.facebook.com/awneesh kumar

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia