जब दिल लगाना ही नहीं था तुमको बाते ही ना करते

Awneesh kumar

रचनाकार- Awneesh kumar

विधा- कविता

जब दिल लगाना ही नहीं था तुमको,
बाते ही ना करते।
बातो से रिझाना ही नहीं था तुमको,
तुम सन्देश ही ना करते।
यादे समेट निकलते तुम्हारी यादो के,
इउ स्मृतियो पर तो पहरा ही ना करते।
अगर दिल ना तोडा होता आज,
ये दर्द सायरी का हम शौख ही ना करते।
(अवनीश कुमार)

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