जब कभी बैठा हुआ होता हूँ मयखाने में

सर्वोत्तम दत्त पुरोहित

रचनाकार- सर्वोत्तम दत्त पुरोहित

विधा- गज़ल/गीतिका

जब कभी बैठा' हुआ होता' हूँ' मयखाने में
पी रहा होता' हूँ' बस गम को मैं' भुलाने में

जाम को होठ छुआ करके' भी' मैं पी न सका
उसकी' तस्वीर नज़र आती' है' पैमाने में

ख़्वाब में मेरे' अयाँ होने' लगी जो हमदम
वो नज़र आती' नहीं मुझको' इस ज़माने में

बस दुआ इतनी' है' क़ामिल हो' वफ़ाएं सबकी
उस ख़ुदा ने ही' वफ़ा भर दी' है' दीवाने में

बात कुछ भी तो' न थी फिर भी हुए' क्यूँ रुस्वा
तोड़ बैठे वो' मिरा दिल भी' तो' अन्जाने में

दिल्लगी तेरी' कभी दिल की 'लगी हो शायद
क्या मिला तुझको' फ़क़त दिल को' यूँ' बहलाने में

खो गया तू ये बता किस गली में "जज़्बाती"
क्या मज़ा आया तुझे दिल से' दिल लगाने में
जज़्बाती

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सर्वोत्तम दत्त पुरोहित
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मेरा नाम सर्वोत्तम दत्त पुरोहित है मैं राजस्थान के जोधपुर शहर का बाशिंदा हूँ , और न्याय विभाग में कार्यरत मैंने अपनी लेखनी को दिशाहीन चलाया उसके बाद मुझे एक गुरु मिले जिनसे मैंने ग़ज़ल लेखन की बारीकियां सीखी उन गुरुदेव प्यासा अंजुम साहब का मैं ऋणी हूँ और मैं जल्द अपनी ग़ज़ल की किताब जज़्बाती नामा पब्लिश करने वाला हूँ आज तक मैंने तकरीबन 500 ग़ज़ल लिखी है धीरे धीरे वो ग़ज़ल मैं यहाँ अपलोड करूँगा सादर आभार

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3 comments
  1. Young poet Sh Purohit is very talented and able to draw pictures by his words,expect one day he will shine like star…… Good Wishes