जबान से लगी चोट कभी ठीक नहीं होती

प्रदीप तिवारी 'धवल'

रचनाकार- प्रदीप तिवारी 'धवल'

विधा- गज़ल/गीतिका

आओ मेरी आवारगी में तुम भी शामिल हो जाओ,
पाप, पुण्य, सुख, दुःख की यहाँ सीख नहीं होती .

लड़ लो, झगड़ लो खूब, पीट लो अपनों को,
क्योंकि जबान से लगी चोट कभी ठीक नहीं होती .

हमने अठन्नी रुपया माँगा तो हिकारत ही मिली,
करोडों, अरबों का डोनेसन यहां भीख नहीं होती .

मेरा भविष्य, बच्चों का भविष्य अनेक पीढ़ी का,
सुनते हैं कि इस तरह की दौड़ ठीक नहीं होती .

कमाते, बचाते, चुराते हुए गुजरी है अब तक,
कहते हैं ऐसी जवानी में कोई रीढ़ नहीं होती .

मेरे कफ़न में एक थैली लगवाना जरूर यारों,
लोग सोचें, कहें बुरी कमाई ठीक नहीं होती .

वो देखता है, सुनता है, समझता है सब कुछ,
मगर चढ़ावे पे चढ़ावा से उसे खीझ नहीं होती .

बचाकर रक्खो इन आँखों का छलकता पानी,
ठगों की दुनिया है, सरलता यहाँ टीक नहीं होती.

प्रदीप तिवारी
9415381880

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प्रदीप तिवारी 'धवल'
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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ. संपर्क -9415381880

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