जन्म जन्म से तुम्हारा है इंतज़ार मुझे

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

जनम-जनम से तुम्हारा है इंतज़ार मुझे
चले भी आओ कराओ जरा दीदार मुझे

उजड़ गया है मेरे इश्क़ का चमन लोगो !
मन मुआफ़िक़ नहीं लगती है अब बहार मुझे

रोज़ अल्फ़ाज़ के खंज़र न चला सीने पर
है गुज़ारिश कि यूं किश्तों में न तू मार मुझे

तेरे पहलू में रहूँ , तुझको रखूँ पहलू में
तेरे साँसों की है खुश्बू से सरोकार मुझे

किस तरह तुमको यकीं आज दिलाये "बबिता "
सिर्फ़ तुमसे है फक़त प्यार बेशुमार मुझे

बबीता अग्रवाल #कँवल

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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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