जन्माष्टमी दोहे : उत्कर्ष

नवीन श्रोत्रिय

रचनाकार- नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष"

विधा- दोहे

कृष्णपक्ष कृष्णाष्टमी,कृष्ण रूप अवतार ।
हुए अवतरित सृष्टि पे,जग के पालनहार ।।

जन्म हुआ था जेल में,भादो की थी रात ।
द्वारपाल सब सो गए,देख अनोखी बात ।।

✍🏽नवीन श्रोत्रिय "उत्कर्ष"©
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नवीन श्रोत्रिय
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नाम - नवीन शर्मा श्रोत्रिय उपनाम - उत्कर्ष जन्म - 10 मई 1991 शिक्षा - स्नातकोत्तर स्थान - बयाना(भरतपुर)राज• पिन - 321401

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2 comments
  1. बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं… सुन्दर चित्रांकन