जन्माष्टमी का पैगाम

कृष्ण मलिक अम्बाला

रचनाकार- कृष्ण मलिक अम्बाला

विधा- कविता

प्रेम की एक अलग परिभाषा के लिए
हर प्रेमी की जुबाँ पर आता है जिनका नाम

माँ के लाड में पुकार कर दुनिया याद करे
किसी नटखट नन्हे का नाम

कर्म की ऊँची शान है इस धरा पर
जीवन भर दिया जिसने ये पैगाम

फर्जो के सन्तुलन में आगे बढ़कर
इतिहास में दिया वास्तिवकता का प्रमाण

जिनके नाम से ही कष्ट मिटे एवम् आनन्द हो मन धाम
ऐसे कन्हैया को जन्माष्टमी पर इस लेखनी का शत शत प्रणाम ।

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कृष्ण मलिक अम्बाला
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कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर कि तुम भी कवि बन सकते हो , कविताओं के मैदान में कूद गये | अब तक आनन्द रस एवं जन जागृति की लगभग 200 रचनाएँ रच डाली हैं | पेशे से अध्यापक एवं ऑटोमोबाइल इंजिनियर हैं |

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