“जनाबेआली “(व्यंग्य कविता)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- कविता

"जनाबेआली"(व्यंग्य कविता)
अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
भाभी को सब माँ कहते हैं
तो साली क्यूँ आधी घरवाली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
भाभी को ननंद पटती नहीं
जीजा को पटती है साली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
पत्नी को तो पति भाता है
पति को भाती बाहर वाली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
एक की थाली में भरपूर व्यंजन
एक की थाली पड़ी है खाली।

अजीब सी कशमकश हैं
जनाबेआली
90फीसद आराम फरमाते
10 फीसद करते रखवाली।

रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "

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ramprasad lilhare
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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

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