जग जननी कल्याण करो

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

आ जाओ माँ धरा पर भी
रक्त बीजों ने शीश उठाया है ,
घात किया है तेरे नारी रूप पर
नहीं वश में किसी के आया है ।

आकर प्रहार करो उन पर
रक्त दंतिका बन जाओ तुम ,
संताप हर पीड़िताओं का
शक्ति उनमें भर जाओ तुम ।

कुछ ऐसे मानव धरती पर
जो दानव बनकर घूम रहे ,
शुभ निशुंभ असुर की भाँति
हर नारी को हुंकार रहे ।

आ जाओ रणचंडी बनकर
अहंकार उनका चूर्ण करो ,
रक्षा कवच का मंत्र देकर
जग जननी कल्याण करो ।

डॉ रीता
आया नगर,नई दिल्ली ।

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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