जगे युवा-उर तब ही बदले दुश्चिंतनमयरूप ह्रास का

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- मुक्तक

युवक जाग जाए तो, विकसित राष्ट्र, भाल छूता विकास का |
अगर सो गया , तब हिंसा औ अवनतिमय दुश्चक्र नाश का |
जस मानव, वैसा स्वदेश है ,सत्य बात सुनिए सुविज्ञ जन |
जगे युवा-उर तब ही बदले दुश्चिंतनमयरूप ह्रास का |
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बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रोंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

जागा हिंदुस्तान चाहिए कृति का मुक्तक

पेज- 19से

05-05-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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