” जंगल सी ज़िन्दगी , मेमने से हम ” !!

Bhagwati prasad Vyas

रचनाकार- Bhagwati prasad Vyas " neerad "

विधा- गीत

सरसराती हवाएं ,
कंपकंपाती हैं !
उठता है शोर कहीं ,
नींद जाती है !
संदली खुशबू कहाँ –
समेटते हैं हम !!

अधिकार हाथों में ,
सम्वेदनाएँ खत्म !
सबके हिस्से में ना ,
अब रहे जश्न !
बेचारगी , विवशता –
लपेटते हैं हम !!

कमसिन उमरिया ,
नजरें फिरी फिरी !
नारी नहीं सबला ,
अब भी डरी डरी !
सपनों की खेती –
बिखेरते हैं हम !!

देते वे शहादत ,
नेता हैं सिरफिरे !
केसर की बग़ावत
मधुवन कहाँ संवरे !
बारूदी सपनों को –
उछेरते हैं हम !

पंख रंग बिरंगे ,
हमको नहीं मिले !
हासिल नहीं ज्यादा
कोई नहीं गिले !
जो भी मिली दुआ –
लपेटते हैं हम !!

Views 107
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Bhagwati prasad Vyas
Posts 74
Total Views 22.5k
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia