छोड़ जाऊंगा।

Neelam Sharma

रचनाकार- Neelam Sharma

विधा- गज़ल/गीतिका

ये न सोचा था कि राहे ज़िन्दगी में,ऐसे भी मोड़ पाऊंगा,
फकत यादों का ही एक मूक सफर छोड़ जाऊंगा।
हूं जब ज़मीं का बंदा, एक दिन मिट्टी में भी मिल जाऊंगा ।
खट्टे मीठे लम्हों की बस भीनी सी सुगंध छोड़ जाऊंगा ।

खिलते बचपन को नन्ही खुशियों से मैं रंग ही जाऊँगा।
हूँ मैं जुगनू ,मगर ज़िंदगी में खासचमक छोड़ जाऊँगा ।
खिलें खुशियों की कलियां,पौध ऐसी मैं लगाऊंगा।
ओस की बूँद सी,गुलिस्तां में महक छोड़ जाऊँगा ।

साथ चलने का वादा करके जो,ढूंढता है अलग राहें।
उसकी यादों से ही, मुख अपना मोड़ जाऊंगा।
धड़कन है दिलबर ,उसे दूर न कर पाऊंगा,
जानते बूझते भला दिल उसका कैसे तोड़ जाऊंगा।

नहीं सोचा था,कतरा कतरा मरके भी जिंदा कहलाऊंगा।
कुछ अपनों की आँखों में बस हसरत ही छोड़ जाऊंगा ।
नीलम जो साथ दे तो, मैं हद से भी गुज़र जाऊंगा।
इक इशारे पर सनम, दुनिया छोड़ जाऊंगा।

नीलम शर्मा

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