छंद कुण्डलिया छंद

Ankita Kulshreshtha

रचनाकार- Ankita Kulshreshtha

विधा- कुण्डलिया

""धरती अंबर सज रहे,
आया मास वसंत ।
योगी टेरे योग को,
नील गगन में हंस ।
नील गगन में हंस ।
स्वर्ग सा लगता ये थल..
भ्रमर हुए मदमस्त..
सरित भी करती कल कल
पुलकित सब संसार
चहुं दिशि खुशियां झरती
सुरभित है हर दिशा
सज रही सुंदर धरती।।।""

अंकिता

Views 55
Sponsored
Author
Ankita Kulshreshtha
Posts 35
Total Views 2k
शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia