छंद कुण्डलिया छंद

Ankita Kulshreshtha

रचनाकार- Ankita Kulshreshtha

विधा- कुण्डलिया

""धरती अंबर सज रहे,
आया मास वसंत ।
योगी टेरे योग को,
नील गगन में हंस ।
नील गगन में हंस ।
स्वर्ग सा लगता ये थल..
भ्रमर हुए मदमस्त..
सरित भी करती कल कल
पुलकित सब संसार
चहुं दिशि खुशियां झरती
सुरभित है हर दिशा
सज रही सुंदर धरती।।।""

अंकिता

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Ankita Kulshreshtha
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शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|
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