चैटिंग

डॉ संगीता गांधी

रचनाकार- डॉ संगीता गांधी

विधा- कहानी

चैटिंग
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तेजी से भागती दौडती ज़िन्दगी में आज सबसे बड़ी जो कमी दिखाई देती है वो है समय की कमी | हमारे रिश्ते समय के अभाव में शुष्क ठूंठ की तरह मुरझा रहे हैं |
पति पत्नी के बीच प्रेम भले ही हो पर यदि दोनों के पास एक दूसरे के लिए समय नहीं है तो रिश्ता वेंटीलेटर पर आ जाता है |
राखी और किशोर का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही हो चला था |एक बड़े शहर की मल्टी नेशनल कम्पनी में किशोर मैनेजर था |राखी एक इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी चलाती थी |कहने को दोनों ने प्रेम विवाह किया था पर आज प्रेम के अलावा उनके पास सब कुछ था |
एक दूसरे से ऊब चुके पति पत्नी अपनी अपनी दुनिया में मग्न थे |अपना अपना काम करना और घर आ कर अपना अपना लैपटॉप लेकर बैठ जाना यही उनकी रूटीन थी |
उम्र राखी पर असर दिखा रही थी |खुद को जवान रखने की काफी कोशिश करती पर" लकीरें झलक ही जाती हैं "| राखी ने इसीलिए फेसबुक पर एक नकली id बना रखी थी -साक्षी के नाम से |स्वयम को कॉलेज गर्ल शो कर रखा था |यूँ एक दिन इस id पर राखी उर्फ़ साक्षी की नज़र एक हैंडसम नौजवान पर पड़ी |नाम कार्तिक —एम बी ए स्टूडेंट |
फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ सिलसिला चैटिंग तक पहुंचा |धीरे धीरे दोनों लम्बी बातें करने लगे |
" तुम्हारा मनपसंद रंग क्या है ?" मेरा पिंक है |
"मुझे नीला रंग पसंद है |ज्यादातर ब्लू शर्ट पहनता हूँ "
रंगों से शुरू हुई बातें मनपसंद खाने ,एक्टर ,किताबें ,संगीत ,पर्यटक स्थल तक पहुंची |
राखी अपने भीतर वही उमंग और ताज़गी महसूस कर रही थी जो उसे अपने कॉलेज के दिनों में किशोर संग महसूस होती थी |
राखी ने नोटिस किया की —किशोर भी आजकल बहुत खुश रहता है |वही मुस्कान उसके चेहरे पर खिली रहती है जो कॉलेज के दिनों में होती थी |राखी की मुस्कान की वजह तो कार्तिक था पर किशोर की मुस्कान की वजह क्या थी ? राखी ने नोटिस तो किया पर वो अपने नये सुख में इतनी मग्न थी की इस ओर उसने ज्यादा ध्यान न दिया |
एक दिन चैटिंग पर कार्तिक ने कहा —" हम दोनों ने एक दूसरे को कभी देखा नहीं ,मान लो यदि मैं जैसा तुम समझती हो !उससे कुछ अलग हुआ तो ?"
"क्या तब हमारी दोस्ती में कुछ फर्क आएगा ?"
"यही प्रश्न तो राखी के मन में भी उठते थे |क्या जवाब दे ? वो समझ न पा रही थी "
कार्तिक –" साक्षी मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ | बस एक बार तुम्हें देखना है "|
" अगर तुमने ना किया तो आज के बाद हम बात नहीं करेंगे "|
" राखी सोच में पड़ गयी ,उसे कार्तिक की आदत हो गयी थी |यदि वो ना कहती है तो भी उनका ये " ऑनलाइन " रिश्ता खत्म हो जायेगा !यदि मिलती है तो कार्तिक असलियत जान लेगा की वो साक्षी नहीं राखी है ,एक बड़ी उम्र की महिला है !रिश्ता तो दोनों ही स्थितियों में खत्म होना है "
राखी ने फैसला किया की वो मिलेगी —" जब रिश्ता ख़त्म ही होना है तो क्यूँ न एक बार कार्तिक को देखकर ,मिलकर ,सच्चाई बता कर खत्म करे " ——-पीड़ा तो होगी ,कार्तिक गुस्सा भी होगा पर राखी का गिल्ट कुछ कम हो जायेगा |
राखी –" चलो मिलते हैं | मैं कल पीवीआर के पास वाले रेस्तरां में शाम 4 बजे आउंगी |मेरी पहचान होगी पिंक ड्रेस ,टेबल नंबर 5 पर "
ठीक " मैं ब्लू शर्ट में आऊंगा ,हाथ में बुके होगा "
———-अगले दिन कार्तिक ठीक 4 बजे रेस्तरां पहुंचा |बुके पहले ही ले चुका था |टेबल नुम्बर 5 पर उसने देखा –पिंक ड्रेस में एक महिला बैठी थी !"
पास पहुंचा —राखी ने नज़रें उठायीं ,
नज़रें मिलीं —–"किशोर के हाथ का बुके टेबल पर गिर गया !राखी भी खडी हो गयी !
दोनों एकदूसरे को घूर रहे थे —–अचानक दोनों खूब ज़ोर से हंसे ! लोग चौंक कर देखने लगे ||दोनों बाहर आ गये "
किशोर तुम कार्तिक !
और राखी तुम साक्षी !———-
तुम नाराज़ हो क्या ?
नहीं राखी —" मैं पहले ही जान गया था की तुम ही साक्षी हो क्यूंकि राखी की एक एक पसंद ही साक्षी की पसंद थी ! तुम्हारा अचानक से खुश रहना मुझसे छुपा नहीं था ——एक दिन तुम बाथरूम में थी तुम्हारा लैपटॉप पड़ा था ,id लॉग इन थी —मैंने सारी चैट पढ़ ली —सारा सच जान गया "
तो तुमने मुझे घर में ही क्यूँ न बताया ?क्यूँ कार्तिक बन चैट करते रहे ?
" में स्वयम जीवन की एकरसता से बोर हो चुका था |तुम्हारे साक्षी रूप के साथ एन्जॉय कर रहा था |एक नया अहसास ज़िन्दगी को नया सुख दे रहा था "
मैंने नोटिस किया था तुम्हारा मुस्काना ,खुश रहना —-पर किशोर अब ?
" अब कुछ नहीं राखी —हम ज़िन्दगी की एकरसता में दुबारा नहीं फंसेंगे | एकदूसरे को पूरा समय देंगे " —हाँ किशोर यही होगा
पर राखी —हम रोज अलग अलग बैठ कर —" साक्षी और कार्तिक बन चैटिंग जरुर करेंगे "—–जीवन का ये रोमांच में खोना नहीं चाहता "
राखी हंसने लगी –बिलकुल ऐसा ही होगा |
तो ज़िन्दगी चलती रही और अचानक नकली id से शुरू हुई चैटिंग ने—- राखी 'किशोर के जीवन को वैनटीलेटर से उतार कर नई सांसों का उपहार दे दिया "
डॉ संगीता गाँधी |

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