*** चुरा ले नींद कोई ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

चुरा ले नींद कोई हमारी कोई बात नहीं
चुराये सपनों को हमारे हमें बर्दास्त नहीं
महक सपनो की भी है हमारे सीमापार
चन्दन -खुशबू भी होती सीमापार नहीं ।।
👍मधुप बैरागी

दिल को कह दो दर्द ना दे अब मुझको
मैं अब थका-हारा ना दे ग़म मुझको
ना चाहिए मुझको उनके गम का सहारा
अब दिल आसरा -बेआसरा कर दे मुझको ।।
👍मधुप बैरागी

तिलिस्म जिंदगी का भी कितना अजीब है
कैच जिंदगी को करने मौत बाउंड्री पर खड़ी है
जिंदगी और मौत के दरमियां इतना फासला है
जैसे कब्बडी में लाईन छूते ही मौत से जिंदगी है ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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