चुप सी धड़कन

purushottam sinha

रचनाकार- purushottam sinha

विधा- कविता

इस दिल में ही कहीं, इक धड़कन अब चुप सा रहता है!

चुप सी अब रहने लगी है, इक शोख सी धड़कन!
बेवजह ही ये कभी बेजार सा धड़कता था,
भरी भीड़ में अब, तन्हा-तन्हा ये क्यूँ रहता है!
अब तन्हाई में न जाने, ये किस से बातें करता है?

इस दिल में ही कहीं, इक धड़कन अब चुप सा रहता है!

कोई खलिश सी है दबी, शायद उस धड़कन में!
ऐसे गुमसुम चुप, ये पहले कब रहता था?
कोई एहसास है जगी, शायद उस धड़कन में!
संवेदनाओं के ज्वर, अब अकेला ही ये सहता है?

इस दिल में ही कहीं, इक धड़कन अब चुप सा रहता है!

चाहे मेरा ये धड़कन, सतत् प्रणय का कंपन!
निरन्तर मृदु भावों से मन का अवलम्बन!
अनवरत छूटते साँसों संग, साँसों का बंधन!
अविरल अश्रृधार का आलिंगन ये यूँ ही करता है!

इस दिल में ही कहीं, इक धड़कन अब चुप सा रहता है!

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purushottam sinha
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