चुपके से निखरी रातों में. .

Neeraj Chauhan

रचनाकार- Neeraj Chauhan

विधा- मुक्तक

बिन बारिश के मौसम में, तेरा बरसना मुझे याद हैं
उन दो कजरारी अखियों का, तरसना मुझे याद हैं,
चुपके से निखरी रातों में, तेरा दिल में आना याद हैं ,
कुछ बातों पर तेरा रोना, कुछ पर मुस्काना याद हैं .. .

– नीरज चौहान

Views 65
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Neeraj Chauhan
Posts 58
Total Views 5.7k
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia