चिरसंगिनी बनकर

कवि कृष्णा बेदर्दी

रचनाकार- कवि कृष्णा बेदर्दी

विधा- गीत

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जब कभी कोई पल खोजती हु चैन की साँस लेने को,

उस साँस में समा जाती है

तुम्हारी याद

चिरसंगिनी की तरह

जब कभी एक पल सोचती हूँ

याद आती है किसी फूल की

उस फूल में समाई होती है

तुम्हारी याद खुशबु बनकर

चिरसंगिनी की तरह

जब कभी बैठती हु झील किनारे

देखती हूँ चाँद को पानी में बहुत दूर

ऐसे ही समाना चाहती हूँ तुम्हारी बाहो में

चाँद बनकर यतार्थ से दूर

चिरसंगिनी बनकर

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कवि कृष्णा बेदर्दी
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कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

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