”चाक पर चढ़ी बेटी”

स्वर्णलता विश्वफूल

रचनाकार- स्वर्णलता विश्वफूल

विधा- कविता

उस स्त्रीलिंग प्रतिमा,
यौवन-उफनाई प्रतिमा को–
एक पुरुष ने खरीदा
और सीमेंटेड रोड पर
पटक-पटक / चू्र कर डाला ।
प्रतिमा के चूड़न को–
सिला में पीस डाला,
और अपनी लार से
मिटटी का लौन्दा बनाया,
उसे चाक पर चढ़ा दिया,
कहा जाता है—
तबसे बेटी / चाक पर चढ़ी है ।

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स्वर्णलता विश्वफूल
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स्वर्णलता 'विश्वफूल' को विदेश मंत्रालय, भारत सरकार (भारतीय सांस्कृतिक-सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली ) के कविता पुरस्कार, यह पुरस्कार प्राप्त करनेवाली बिहार की एकमात्र कवयित्री ; बिहार के शिक्षा मंत्री से 'बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् पुरस्कार' ; राजभाषा विभाग, बिहार सरकार के अनुदान पुरस्कार; राष्ट्रीय कबीर पुरस्कार (महाकवि नागार्जुन ट्रस्ट, मधुबनी); शिक्षा विभाग, बिहार की जिला शिक्षक पुरस्कार ।

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