चाँद अब रोशनी नहीं देता

sunil soni

रचनाकार- sunil soni

विधा- गज़ल/गीतिका

चाँद अब रौशनी नहीं देता
अब तो एक आग सी निकलती है ।
देख लो आके उनके आँगन में
बर्फ अब सर्दियों में गलती है ।।
किसको जाना कहाँ ?कहाँ मंजिल?
हर गली रोज ढलती है ।
बैठो गर पाना है पता मंजिल
यहाँ स्वारथ की रेल चलती है।।
तेल में डूब और उसे पीकर
बाती दीये की क्यों मचलती है ।
बात दुनियां की भी निराली है
अपना कह कर उन्हीं को छलती है ।।
क्यों करे बात कोई दरिया की
जहां कागज की नाव चलती है ।
सच की दुनियां तो अब हुई तन्हां
बात अब झूठ की ही चलती है ।।

Views 147
Sponsored
Author
sunil soni
Posts 7
Total Views 711
जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia