चलो आज कही चलते है

pratik jangid

रचनाकार- pratik jangid

विधा- कहानी

चलो आज कही चलते है ।
कुछ मेरी कुछ तुम्हरी सुनते है सुनाते है ।
इन डगर पर हाथो में हाथ पकड़कर कुछ गनगुनाते है ।
चलो आज कही घूम कर आते है ।
कुछ खटी मीठी यादो के लम्हो में हो कर आते है ।
कुछ किस्से दोहराते है ।
तुम्हे याद है उस नदी के किनारे पर फिसलते हुए तुमने मेरा हाथ थाम था । चलो आज उस नदी के पास कुछ वक्क्त बिताकर आते है ।
……चलो आज कही चलकर आते है ।
बिते हुए लम्हो को थोड़ा सा घूमकर आते है ।

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