चले राह पर धर्म की

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

चले राह पर धर्म की,करे निरन्तर काम !
सूरज की तकदीर मे,कहाँ लिखा आराम ! !

लडते हैं बाजार मे,..ज्यों सरकारी सांड !
टीवी चैनल पर लडें,इसी भांति कुछ भांड !!

यही गनीमत है बड़ीं, आज़ादी पश्चात !
ले लेता हूँ सांस मै,कर लेता हूँ बात !!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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