चले पिचकारी प्रेम रंग की

sunil soni

रचनाकार- sunil soni

विधा- कविता

चले पिचकारी प्रेमरंग की
समता रूपी उड़े गुलाल ।
बैर भाव तज होली खेलें
तज दें मन के सभी मलाल ।।

मन एक बर्तन वाणी पानी
प्रेम से प्रेमरंग दो डाल ।
राम रहीम एक संग खेलें
प्रेम की रंग गुलाल ।।

होली के पावन पर्व की आप सभी को मंगलमयी शुभकामनायें ।
आपका
सुनील सोनी "सागर"
चीचली(म.प्र.)

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sunil soni
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जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637
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