चले जाते हो….

Zo Zo Sandeep Yadav

रचनाकार- Zo Zo Sandeep Yadav

विधा- गज़ल/गीतिका

मुझसे नजरें मिलाकर चले जाते हो,
दिल ये मेरा चुराकर चले जाते हो।।
कहना चाहूँ अगर कुछ भी सुनते नही,
हाथ अपना छुड़ाकर चले जाते हो।।
बात दिल की दबी दिल में ही रह गयी,
होंठ अपना दबाकर चले जाते हो।।
मन करे गर कभी देखने का तुम्हे ,
अपना चेहरा छुपाकर चले जाते हो।।
हक जताकर के दिल पे मेरे जानेजां,
आग दिल में लगाकर चले जातेहो।।
मानो छायी हो अंबर में काली घटा,
काली जुल्फें उड़ाकर चले जाते हो।।
पल में संदीप मर जाता है देखकर
जब भी पलकें गिराकर चले जाते हो।।
संदीप यादव(Zo Zo)
आजमगढ

Sponsored
Views 20
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Zo Zo Sandeep Yadav
Posts 10
Total Views 141
संदीप यादव अजगरा,अतरौलिया। जिला:- आजमगढ़ विधा:- गजल,गीत व मुक्तक ।।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia