चली गई इंसानियत

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

खबरें अब अखबार की,लगती है नासूर !
चली गई इंसानियत, छोड शहर को दूर !!

काँटे जीवन मे हमे,करना पडे कबूल !
सींचा दोनो हाथ से,हमने अगर बबूल!!

मारें घर मे नक्सली,..सीमा पर शैतान !
इतनी सस्ती हो गई,वीरों की अब जान !!

समझें भाषा तोप की,वो जो सदा रमेश !
उनसे आना चाहिए,..तोपों से ही पेश! !
रमेश शर्मा.

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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