** चलना थोड़ी दूर था **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गज़ल/गीतिका

चलना थोड़ी दूर था
उसमे ही
क़दम लड़खड़ा गये
फिर क्या जिंदगीभर
साथ निभाओगे तुम
याद करके वो वादे
और कसमे हमनशीं
कभी तुम पे तो कभी
खुद पे आती हँसी
इब्तिदा-ए-इश्क में खायी थी
कसमे संग जीने मरने की
आज क़दम दो चलना
साथ में गवारा नहीं
तुम्हारे शिद्दत-ए-इश्क को
समझूं क्या
सिर्फ जिस्म तुष्टि का बहाना कोई
चलना थोड़ी दूर था
वरना संग चलना तुम्हारे क्या
दौड़े आते तुम्हारी इक सदा पे हम
यूँ राहे इश्क में संग जीते और मरते हम
यूँ तुम्हारी तरहा रुकने का ना करते बहाना
चलना थोड़ी दूर था उसमें ही क़दम लड़खड़ा गये
चलना थोड़ी दूर था
चलना थोड़ी दूर था ।।

👍मधुप बैरागी

Views 20
Sponsored
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 240
Total Views 2.9k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia