** चंद विचार ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- अन्य

क्या ख्वाब ले रही है वो
हो कर दुनियां से बेखबर
प्यार भरी निगाहों से देख रही है
किसके सपने सुहाने प्यार की चाह में
हमसफ़र के लिए क्या सोचती वह ।

कई बार आदमी लाख कौशिश करता है
फिर भी उसका काम सफल नहीं होता
कई बार अल्प कौशिश करने पर भी
मन की मुराद पूरी हो जाती है इसी को
कहते है होई सोई जो राम रची रखा ।।
जो काम राम नहीं कर पाते वह काम
राम के सेवक हनुमान बना देते है ।।
अंजना नन्दन की जय

कब बिगड़ी है दुनियां उसकी
जिसने इंसान से बना के रखी
लोग केवल ढोंग करते है
उसईश्वर से दोस्ती निभाने का
वह तो हमेशा से तत्पर है
हमें गले लगाने को
हमखुद ही उससे दूर भागते हैं
क्योंकि हम संसार चाहते हैं
वो संसार से पार लगाना।।

मत दुखी हो अपने अभावों से
अभावों में भी भाव छुपा होता है
देनेवाले ने जो ग़म दिए हैं तुझको
वो भी किसी उपहार से कम नहीं
दुनियां की खुशियाँ मिले ना मिले
ईश्वर उपहार मिला ये क्या कम है
चुनते नहीं यूं ही किसी जन को
तुम्हें चुना उसने ये क्या कम है ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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