घुटने टेके नर, कुत्ती से हीन दिख रहा

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- अन्य

(मुक्त छंद)

चर्म रोग में चाटता, कुत्ता अपनी खाल|
मानव निज तन कर रहा, खुजा खुजा कर लाल||
खुजा खुजा कर लाल, हारकर वैद्य बुलाता |
कुक्कुर बिना दवा के चंगा, रोब दिखाता||
कह "नायक" कविराय, श्वान स्वाधीन दिख रहा |
घुटने टेके नर, कुत्ती से हीन दिख रहा ||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

नकली रंग न लताएं, चर्म रोग हो सकता है |

असली/प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें
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निम्न बिंदुओं पर अमल करें
1-स्वास्थ्य का ध्यान रखें
2-सफाई से रहें
3-मानवीय मूल्योंकी रक्षा करें
4-विविधता में समरूपता के दर्शन करे
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जय हिंद,
होली की शुभकामनाएं

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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