घुटती सिसकियां

dr. pratibha prakash

रचनाकार- dr. pratibha prakash

विधा- कविता

——
घुटती रहेंगी आखिर कब तक
सिसकियाँ दरवाजो में
लुटती रहेगी कब तक नारी
वासना के गलियारों में
भ्रूण हत्या दहेज हत्या
ग्लैमर के नंगे चौबारे में
राजधानी की डीलक्स बसों में
सफेद चमचमाती कारों में
घर की चारदीवारी में या
खेतो और खलिहानों में
कभी अज्ञात बलात्कारी होते
कहीं रिश्तों के परिधानों में
कोई निर्वस्त्र फूलन बन जाती
कई दम तोड़ देती अस्पतालों में
क्यों लिखा पूज्यनीय नारी है
शक्ति रूपा पुराणों में
क्यों लज़्ज़ा को लज़्ज़ा नहीं आती
नहीं हया रही हैवानो में
कब तक समाज कर्महीन रहेगा
कब होगा सुधार संविधानों में
कब सोई सत्ता जागेगी
थमेगा मवाद क नापाक इरादों में
कब तक नारी परित्यक्ता रहेगी
अपनी ही बेगानो में
ये प्रश्न नहीं मात्र मेरा
हुंकार आज ये हर आँगन में
हे आदिशक्ति कुरुक्षेत्र चुनो
अब तो आओ मैदानों में
हे आदि देव महादेव कहो
क्या दण्ड हो समाधानो में
एक सलाह मेरी मानो
ये पुरुष पुरुषत्व विहीन करो
हो प्रतिबंधित इनका जीवन
समाज राक्षस विहीन करो
समाज राक्षस विहीन करो

जय भारत जय माँ भारती

Views 46
Sponsored
Author
dr. pratibha prakash
Posts 44
Total Views 1.8k
Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु गॉड कहा गया है की कृपा से आध्यात्मिक शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र में प्राप्त ज्ञान सत्य और स्वयं को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment
  1. सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत बधाई आपको . कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |