घर 🏠

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

केवल चार दीवारों के भीतर बनाए
गए कमरों का नाम नहीं है घर।
कोने कोने में रहती है जहाँ जिन्दगी
पग पग पर मिलती है जहाँ खुशी।
हर पल खिलखिलाती है जहाँ हंसी
चारों तरफ बिखरी है जहाँ मुस्कान।
पल पल बरसता जहाँ अपनापन
वही घर होता है नहीं होता है मकान।
यही है घर की असली परिभाषा
यही है घर की असली पहचान ।
ईंट पत्थर की चारदीवारी में
जब पड़ जाती है अपने पन की जान।
तब कहीं जा कर एक प्यारे से घर में
बदल पाता है कोई मकान।

—रंजना माथुर दिनांक 08/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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