कोई ज्यादा पीड़ित है तो कोई थोड़ा

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- अन्य

(मुक्त छंद)

सफरचट्ट, मक्खीकट, पतली, कभी ऐंठ में मूँछ|
कभी- कभी लाचार दिखे जैसे कुत्ते की पूँछ ||
ज्यों कुत्ते की पूँछ, मूँछ की हालत ऐसी |
बिना मूछ वाली ने कर दी सब की ऐसी तैसी||
कह "नायक" कविराय पसीना गलमुच्छों ने छोड़ा|
कोई ज्यादा पीड़ित है तो कोई थोड़ा ||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

उक्त मुक्त छंद " दैनिक आज" समाचार पत्र कानपुर में दिंनांक-27मई 1999 को प्रकाशित हो चुका है |
1999में मैं उरई में रहता था |
बृजेश कुमार नायक

Views 124
Sponsored
Author
Brijesh Nayak
Posts 100
Total Views 9.7k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia