गज़ल :– ज़ख्म मेरे ही मुझे सहला रहे हैं ।।

Anuj Tiwari

रचनाकार- Anuj Tiwari "इन्दवार"

विधा- गज़ल/गीतिका

गज़ल :– ज़ख्म मेरे ही मुझे सहला रहे हैं ।।
बहर :- 2122–2122-2122

ख्वाब बन आँखों में अब वो छा रहे हैं ।
ज़ख्म मेरे ही मुझे सहला रहे हैं ।

मन्नतों में जो कभी मांगे हमें थे ,
आज क्यों नज़रें चुराकर जा रहे हैं ।

कर्ज हम रखते नहीँ ज्यादा किसी का ,
उनकी यादें तोल कर लौटा रहे हैं ।

कातिलाना है बड़ी उनकी अदायें ,
अब शहर में जुल्म बढ़ते जा रहे हैं ।

कत्लखानों में ज़रा मंदी हुई क्या ,
देखो वो गंगा नहा कर आ रहे हैं ।

देखिए दहलीज ये पानी में डूबी ,
आप ऐसे आँख क्यों छलका रहे हैं ।

गज़लकार :– अनुज तिवारी "इंदवार"

Views 9
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Anuj Tiwari
Posts 107
Total Views 17.9k
नाम - अनुज तिवारी "इन्दवार" पता - इंदवार , उमरिया : मध्य-प्रदेश लेखन--- ग़ज़ल , गीत ,नवगीत ,कविता , हाइकु ,कव्वाली , तेवारी आदि चेतना मध्य-प्रदेश द्वारा चेतना सम्मान (20 फरवरी 2016) शिक्षण -- मेकेनिकल इन्जीनियरिंग व्यवसाय -- नौकरी मोबाइल नम्बर --9158688418 anujtiwari.jbp@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia