“ग्रामीण युवा (दोहा छंद)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- दोहे

"ग्रामीण युवा"(दोहा "
1.
तुम ही उजल भविष्य हो, तुम ही गाँव कि शान।
वजूद तुम हो गाँव का, तुम ही हो पहचान।।
2.
तुम बड़ो तो गाँव बड़े,तुम हो गाँव कि आन।
जुनून तुम हो गाँव का, तुम ही हो सम्मान।।
3.
तुम कालों के काल हो,तुम हो बहुत महान।
तुम चाहो तो नाश हो,तुम चाहो निरमान।।
4.
तुम चाहो धरती हिले, फट जाय आसमान।
गर तु मन में ठान लें, तुझको मिले जहान।।
5.
तुम गाँव के हो पहरी, तुम ही हो अरमान।
तुम ही गीता गाँव की, तुम ही पाक पुरान।।
6.
प्रेम भाव रखो मन में, मिल जाये भगवान।
करलो एेसा काम तुम, बन जाये पहचान।।
रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "

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ramprasad lilhare
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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।
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