ज्ञान नैनू पकड़, बन अमल दिव्य पथ

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- गीत

प्रेम शुभ दिव्य सत् ,स्व विचारों को मथ|
ज्ञान नैैनू पकड़, बन अमल दिव्य पथ |

यामिनी के प्रहर- सम तुम्हारी पलक|
प्रीति मन संग खेले, दे रतिमय झलक|
किंतु दिल बोले सद्प्रेेम में वासना
कभी आएगी न, लेता हूँँ शपथ|
प्रेम शुभ……….

सद् सहारा तुम्हारे हृदय फूल का |
दिव्य चाहत की प्यासी, अमल भूल का |
प्रीतिमधु उर चखें, बोध नहिं हो वृथा|
चित्त पर नहीं भारी पड़े, मनमथ |
प्रेम शुभ…….

जग कला, शुचि मुहब्बत के अनुनाद की |
हर्षमय सत् मिलन, सुख के संवाद की |
ईश्वरी पूरे आनंदमय रास की |
आत्मा एक ,दो सिर्फ तनमय सु रथ|

प्रेम शुभ दिव्य सत् , स्व विचारों को मथ|
ज्ञान नैनू पकड़,बन अमल दिव्य पथ|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी, निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र. सम्पर्क9455423376whatsaap9956928367

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