गुलिस्ता

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- मुक्तक

गुल का गुलिस्ता से है ,…..रिश्ता ए पुराना
अजीज कोई बन जाता, जीवन में अनजाना
शुरू होता है तब जीवन का नया अफसाना
खिलता आंगन में फूल ,महक जाता आशियाना

रीता यादव

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Rita Yadav
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