गुलाबों की तरह खिलना कहाँ आसान होता है

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

रचनाकार- लोधी डॉ. आशा 'अदिति'

विधा- मुक्तक

गुलाबों की तरह खिलना कहाँ आसान होता है
गले काँटों से मिल हँसना कहाँ आसान होता है
मिटा देते हैं ये खुद को लुटाने के लिए खुश्बू
ख़ुशी यूँ बाँट कर मिटना कहाँ आसान होता है

लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
बैतूल

Sponsored
Views 145
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
लोधी डॉ. आशा 'अदिति'
Posts 68
Total Views 10.2k
मध्यप्रदेश में सहायक संचालक...आई आई टी रुड़की से पी एच डी...अपने आसपास जो देखती हूँ, जो महसूस करती हूँ उसे कलम के द्वारा अभिव्यक्त करने की कोशिश करती हूँ...पूर्व में 'अदिति कैलाश' उपनाम से भी विचारों की अभिव्यक्ति....

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia