मुझे गुरूर -न दे

Anish Shah

रचनाकार- Anish Shah

विधा- गज़ल/गीतिका

मेरे मौला जो भी देना है दे गुरूर न दे।
मेरे अपने को जुदा करदे वो सुरूर न दे।।

एक प्यासे की तश्नगी जो बुझा न सके
ऐसी दौलत का समंदर मेरे हुजूर न दे।।

हर शख्श जहां से मुझे अदना सा लगे
ऐसी होती है बुलंदी मुझे जरूर न दे।।

कड़कती धूप में रहवर को छांव दे न सके
मेरे आंगन के दरख्तों में वो खजूर न दे।।

आज भाई बना हुआ अपने भाई का रकीब
एक दरिया के किनारों को इतनी दूर न दे।।

लोग कहते है ये "अनीश" बेअदब है बड़ा
मेरे किरदार में मौला जरा सऊर तो दे ।।

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Anish Shah
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अनीश शाह (अध्यापक) एम. एस. सी (गणित) बी. एड. निवास-सांईखेड़ा ,नरसिंहपुर (म.प्र.) मो. 7898579102 8319681285

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