गुरु वंदन …..

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- कविता

प्रथम चरण वंदन गुरु देव को, राह अस्तित्व की दियो बताये।
मुझे निर्जन शिला से, घिस घिस कर नगीना दियो बनाये ।।

कितने शुभ दिवस पर बना आज पावन संजोग
गुरु गणपति संग आयो है गुरु दिवस का योग ।।

गुरु महिमा बखान क्या कीजे , मन बुद्धि गुरु से निर्मल होये ।
बिन गुरु जीवन पत्थर समान, पड़े हाथ गुरु के मोती बन जाये ।।

जीवन के श्रंगार को रूप मिले माता पिता के प्रेम ज्ञान से ।
खुशबू के रंग भरता गुरु, जीवन महकता उनके कल्याण से ।।

नमन हर उस इंसान को जो जीवन में मेरे आता है ।
देकर अच्छे बुरे अनुभव कुछ न कुछ सिखा जाता है ।।
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डी. के निवातियाँ _____@@@

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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2 comments
  1. आज के इस teacher’s day के शुभ दिन पर आपकी ये शानदार रचना हम सब के लिये एक सीख होगी !!!