** गुमसुम आज मेरा दिल है **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

😢रुक गयी है स्वांसे

थम गयी है आंधियां

न जाने कौन सा कत्ल

कर आया जो गुमसुम

आज मेरा दिल है ।।
👍मधुप बैरागी

दिल धड़कता है

किसी हसी मुखड़े को देखकर
मगर

ये क्या

मेरे दिल को किसी ने यूं

उसकी जगह से बाहर निकाला किसने

दिल पूछता है उससे

जिसने जिस्म से अलग किया इस दिल को
कहां है वो दिलबर

जिसने दरबदर की ठोकरें खाने के वास्ते छोड़ा

इस क़दर

एकबार आकर तो कह दे

मुझे तुम से प्यार है

आज भी यह दिल धड़कता है

सिर्फ तुम्हारे लिए

देख इसकी धड़कनों को

इसे तेरा इंतजार आज भी है ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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