*** गीत ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

गीत
प्रारम्भिक बोल 👍

बैठी हूं इंतजार करूं
देखूं ऊंट सवार घणू
देखूं थांरी छवि घणी
नैणा में रख प्यार करुं ।।
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प्रीतम म्हारे हिवड़े री
हिवड़े में राखयो जी
निरखण लागी घर री नार
घर कद पधारोगा भरतार
सूनी सूनी रातड़ली में
तारा गिण काढ़ा सारी रात
घर कद पधारोगा म्हारा भरतार
चांदणी रातां म्हारी बैरण
बण गयी नींदड़ली
सुपनो जाग्यां कैयां आवे
आ बैरण बण गयी नींदडली
रूखां नीचे बैठी रोऊं
जोऊं थारी बाटड़ली
नैण भया बिन नीर उदास
धोरां माहीं सूजे नांही
हो गया कण्ठ उदास
गातां गातां थारी अरदास
सुणै नाहीं कोई बातड़ली
इब बता दे धरुं कैयां धीर
निहारूं थारी बाटड़ली
प्रीतम म्हाने हिवड़े में राख्यो
निरखूं थांरी भोळीभाळी सूरतड़ी
प्रीतम म्हारे हिवड़े री
हिवड़े में राख्यो जी ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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