गीत

Sandhya Chaturvedi

रचनाकार- Sandhya Chaturvedi

विधा- गीत

विषय-शहीदी दिवस
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"आओ मिल कर नमन करे,
उन वीर सपूतों को,
जिस ने ओढ़ बसन्ती चोला
चूमा धरती को,
गली गली में झुमा उन की
देशभक्ति का गाना,
"ओ माई रंग दे बसंती चोला"

शर्मिंदा है आज शहादत
रोते होंगे वीर वहाँ भी,
जिस की खातिर,
मौत को चूमा।
उस देश के लोगो ने ही ,
उन की माँ को छिना।
दूर हो गयी आजादी,
हो गए गुलाम फिर से हम।
खा रहे अंग्रेजो की भाँति,
पहन अंग्रेजी चोला,
भूल गए वो अपना बसन्ती चोला।।

हुए गुलाम भूल हिंदी को
अंग्रेजी में झूमे हर बच्चा
कहाँ गई वो मातृभाषा
कहाँ गया वो मेरा स्वदेश

अंग्रजो की जेब भरते
उन का ही खाना खाते,
उन की ही साबुन से नहाते
उन के दिए पेय पीते
उन के इंग्लिश गाने गाते।।

हाय कहाँ खो गया वो मेरा देश
कहाँ खो गयी बसन्ती गलियाँ,
वो गाँवो की चंचल छोरीयॉ,
वो माँ का आँचल,
वो वीरो की टोलियां।।

भूल आजादी के तांडव को
क्यू अंग्रेजी में गाते है।

सोचो क्या हम सब सच्चे
भारतीय कहलाते है।।

नमन उन वीरो की शहादत को।।
जय भारती, माँ भारती।।
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✍संध्या चतुर्वेदी।।
मथुरा यूपी

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Sandhya Chaturvedi
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नाम -संध्या चतुर्वेदी शिक्षा -बी ए (साहित्यक हिंदी,सामान्य अंग्रेजी,मनोविज्ञान,सामाजिक विज्ञान ) निवासी -मथुरा यूपी शोक -कविता ,गजल,संस्मरण, मुक्तक,हाइकु विधा और लेख लिखना,नृत्य ,घूमना परिवार के साथ और नए लोगो से सीखने का अनुभव। व्यवसाय-ग्रहणी,पालिसी सहायक,कविता लेखन
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