गीत :जिगर मोहब्बत का है मंदिर..💝💝💝

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गीत

प्रेम मेरा है देख जरा तू,सुंदर मधुर मनोहर।
तेरी छवि दिल में बसी रहे आठों ही पहर।।

तू हवा-सी चंचल,झरनों-सी बहती कलकल।
तेरा रूप मेरी आँखों में सजता देख पलपल।
एक स्वर हो,एक जिगर हो एक प्रीत डगर।
तेरी छवि……………………

तुझे हँसता देख मेरे दिल का चाँद खिलता है।
तेरा रूप इतना सलौना देख फरिश्ता जलता है।
मुझको भाता भोलापन ये सादापन तेरा निखर।
तेरी छवि…………………….

ये शर्मिली आँखें,ये नाजुक होठों के दो फूल।
मुझे सिखाते हैं रिझाकर वफा के सारे उसूल।
यूँ लगता मेरा. दिल तेरी चाहतों का है शहर।
तेरी छवि…………………..

ये कोयल-सी बोली,ये जालिम हैं तेरी अदाएँ।
मुझे लुभाती हैं बुलाकर चंचल भाव-भंगिमाएँ।
यूँ लगता मेरा मन तेरी आरजू की है डगर।
तेरी छवि……………………

ये केशों के बादल,हवा में लहराता ये आँचल।
मुझे बुलाता है सताकर चेहरे का काला तिल।
यूँ लगता है मेरा जिगर मोहब्बत का है मंदिर।
तेरी छवि…………………….
…राधेयश्याम बंगालिया..प्रीतम
कृत.सर्वाधिकार सुरक्षित गीत….💝💝💝

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Radhey shyam Pritam
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