* गीत:- ऐ राधा ऐ राधा *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

ऐ राधा ऐ राधा
तेरे प्यार को मैं अब कौन सा नाम दूं
दिल मेरा है तेरा इसे कौन सा नाम दूं
ऐ राधा ऐ राधा
तुम बिन है श्याम अब आधा है आधा
तेरे दिल को मैं अब यूं क्यूं इल्ज़ाम दूं
ऐ राधा ऐ राधा
तुम बिन नहीं पल-पल रातों का चैन
तुम बिन नही कल-दिल-विलक-विफल
ऐ राधा ऐ राधा
मैं रास रचैया पर अब तुमसे से आस
आओ हमारे संग रास फिर फिर रचाये
ऐ राधा ऐ राधा
तुम बिन है श्याम अब आधा है आधा
तेरे दिल को मैं अब यूं क्यूं इल्ज़ाम दूं
ऐ राधा ऐ राधा
ना पुकारूंगा मैं अब तेरे नाम को फिर
ना हो अब मेरे नाम-संग बदनाम फिर
ऐ राधा ऐ राधा
ना बोलूं मैं तुझसे दिल दिल बेज़ार हो
मेरा ये तीर तेरे दिल के आर-पार हो
ऐ राधा ऐ राधा
रूठे जो तूं मुझसे मैं ना हूं वो कान्हा
मान मनाये तुझको बांसुरी बजा कान्हा
ऐ राधा ऐ राधा
मैं तो अनाड़ी ना जानू मना – मनाना
तुझको जो भाये कान्हा दौड़ी तूं आना
ऐ राधा ऐ राधा
देखूं मैं तुझको क्या आता है मनाना
श्याम सलोना नहीँ है दिल साफ़ हमारा
ऐ राधा ऐ राधा
तेरे प्यार को मैं अब कौन सा नाम दूं
दिल मेरा है तेरा इसे कौन सा नाम दूं
ऐ राधा ऐ राधा

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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