मन बांधे कब बंधा

Sharda Madra

रचनाकार- Sharda Madra

विधा- गज़ल/गीतिका

मन बांधे से न बंधा, ऊँची उड़े उड़ान
बाँधा जिसने है इसे, वो ही चतुर सुजान
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लोभ करना बुरी बला,जाओगे तुम डूब
बनो सहारा दीन का, अच्छे बन इंसान
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ज्ञानी चाहे तुम बनो, ऊंचे पद आसीन
रहिये सदा विनम्र भाव, मत कीजे अभिमान
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त्यौहारों का देश ये, भारत जिसका नाम
संस्कृति में धनवान है, सब धर्मों की खान
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अतिथि का सत्कार यहाँ, नहीं किसी से बैर
गौ को भी माता कहें, नदियों का सम्मान

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Sharda Madra
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