गीतिका:

DrRaghunath Mishr

रचनाकार- DrRaghunath Mishr

विधा- गज़ल/गीतिका

बड़े – बड़ों को, आइना दिखा दिया हमने.
हँसना – रोना, व गाना सिखा दिया हमने.
कल तलक, जिन्हें मालूम नहीं थीं राहें,
आज उनको भी, चला -हिला दिया हमने.
देखिये अनपढ़,दिख रहे थे जो कल तलक,
खुद से ही, खुद को खुद लिखा दिया हमने.
आइना झूठ, न कहता हरगिज़ हो कुछ भी,
सार्वभौम इस,सच से मिला दिया हमने.
अच्छा नहीं, ज्यादा गुरूर सत्य है कहन,
'सहज' सरल, कथन अभी पढ़ा दिया हमने.
@डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता/साहित्यकार
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DrRaghunath Mishr
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डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' अधिवक्ता/साहित्यकार/ग़ज़लकार/व्यक्तित्व विकास परामर्शी /समाज शाश्त्री /नाट्यकर्मी प्रकाशन : दो ग़ज़ल संग्रह :1.'सोच ले तू किधर जा रहा है 2.प्राण-पखेरू उपरोक्त सहित 25 सामूहिक काव्य संकलनों में शामिल

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