गीतिका

sanjay giri

रचनाकार- sanjay giri

विधा- गज़ल/गीतिका

*गीतिका *

देश हित के लिए खेलती बेटियाँ
हर कदम पर यहाँ जीतती बेटियाँ

देखिये देश में अब पदक ला रहीं
बढ़ धरा से गगन चूमती बेटियाँ

आन को मान को देश की शान को
हर मुसीबत से हैं जूझती बेटियाँ

बेटियों पर पिता को हुआ नाज़ अब
लग पिता के गले झूलती बेटियाँ

खूबसूरत सुमन सी लगे हैं सदा
बन के खुशबू यहाँ महकती बेटियाँ

घर चलो लौट कर तुम न देरी करो
राह में बस यही सोचती बेटियाँ

आप 'संजय' सदा नेह देना इन्हें
हाथ सर पर सदा माँगती बेटियाँ

संजय कुमार गिरि
करतार नगर दिल्ली -53
9871021856

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